सेना में भर्ती होने के बाद पढ़ाई नहीं छोड़ी थी, वो कमांडिंग ऑफिसर बनना चाहता था - news

news

latest english news,breaking news

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Wednesday, June 24, 2020

सेना में भर्ती होने के बाद पढ़ाई नहीं छोड़ी थी, वो कमांडिंग ऑफिसर बनना चाहता था

शादी के दस साल बाद तक हम मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे तक में गए। खूब पूजा-पाठ किया। मिन्नतें कीं। एक ही कामना था कि कैसे भी घर में बच्चा आ जाए। लोग हमें अलग-अलग जगह जाने की सलाह देते थे। कोई किसी मंदिर का पता बताता था तो कोई इबादत के लिए मस्जिद में जाने को बोलता था। हमने सब किया तब कहीं जाकर शादी के दस साल बाद अंकुश पैदा हुआ था।

मां-बाप ने खूब मिन्नतें की थीं, तब कहीं जाकर उनके घर किलकारियां गूंजी थीं।

यह कहते हुए गलवान में शहीद हुए अंकुश ठाकुर के पिता और रिटायर्ड फौजी अनिल ठाकुर का गला भर आया। बोले, साहब 1988 में मेरी शादी हुई थी और अंकुश का जन्म 24 नवंबर 1998 को हुआ। मैंने अपनी दस साल की नौकरी में सेना से जो कमाया था, वो तो इसी में खर्च कर दिया था कि मेरे घर में भी बच्चे की किलकारियां गूंजे। मेरी पत्नी को भी मां बनने का सुख मिले और मेरा परिवार भी आगे बढ़े।

दस साल बाद बच्चा पैदा हुआ था, इसलिए अंकुश घर में बहुत लाड़ले थे। सब उन्हें प्यार करते थे।

बड़ी मुश्किलों के बाद हमारे घर में खुशियां आई थीं। 1998 में जब अंकुश का जन्म हुआ, तब मेरी पोस्टिंग मेरठ में थी। 2002 में धर्मशाला आया और 2003 में 17 साल 6 महीने सेना में सेवा देने के बाद मैं रिटायर हो गया। घर की माली हालत खराब थी इसलिए 2005 में डिफेंस सिक्योरिटी कोर(डीएससी) ज्वॉइन कर ली थी, ताकि मेरा बच्चा अच्छे से पढ़-लिख सके।

अंकुश में सेना में जाने का बहुत जुनून था। पिताजी के मना करने पर भी उन्होंने कह दिया था कि मैं सेना में ही जाऊंगा।

अंकुश पढ़ने में भी बहुत तेज था लेकिन न जानें क्यों उसमें शुरू से ही सेना में जाने का जुनून और जोश था। मैं नहीं चाहता था कि वो सेना में जाए। मैंने सोचा कि बड़ी मिन्नतों के बाद तो पैदा हुआ है, लेकिन उसने साफ कह दिया था कि मैं सेना में ही जाऊंगा। उसका फौलादी इरादा देखकर मैंने भी फिर उसे मना नहीं किया। उसने तो सेना में जाने की कसम खा रही थी।

परिवार से 20 मई को आखिरी बार अंकुश की बात हो पाई थी।

12वीं के बाद उसने बीएससी में एडमिशन लिया। दूसरी बार में ही भर्ती में उसका सिलेक्शन हो गया था। जनवरी 2019 में उसने सेना ज्वॉइन की थी। अंकुश के सिलेक्शन के वक्त हमारे गांव कडोहता में 16 साल बाद ऐसा हुआ था कि गांव का कोई लड़का सेना में भर्ती होने में कामयाब हुआ है। पहले हमारे गांव में हर घर से लड़के सेना में ही जाते थे। मैं सेना में रहा। मेरे पिताजी सेना में थे। शायद हमारे खून में ही सेना में भर्ती होना लिखा है।

परिवार जवान बेटे की शादी के लिए लड़की की तलाश में था लेकिन पलभर में खुशी, मातम में बदल गई।

सेना में जाने के बाद भी अंकुश ने पढ़ाई करना नहीं छोड़ा था। वो कमांडिंग अफसर बनना चाहता था। मेरी उससे आखिरी बार बात 20 मई को हुई थी। तब उसने बताया था कि, चीन से कुछ टेंशन चल रही है और हालात अभी ठीक नहीं हैं। इसके बाद मैंने उससे कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन बात हो ही नहीं सकी। 16 जून को सीधे उसके शहीद होने की खबर ही मुझे मिली।

अंकुश को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान सेना के अफसर मौजूद थे।

दूसरा बेटा 12 साल का है, वो भी सेना में जाना चाहता है
अंकुश के पिता अनिल कहते हैं कि अंकुश के जन्म के दस साल बाद हमारे घर दूसरा बेटा 2008 में हुआ। वो सातवीं क्लास में है, लेकिन अभी से ही सेना में जाना चाहता है। कहता है मुझे सेना में ही जाना है। मैं उसे भी नहीं रोकना चाहता। अंकुश की शहादत पर मुझे गर्व है। उसने हमारे पूरे गांव का नाम रोशनकिया है।

अंकुश को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके घर पर भीड़ उमड़ पड़ी थी।

ऐसा पहली बार हुआ है, जब हमारे गांव से किसी ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अब गांव का एक स्कूल उसके नाम से जाना जाएगा। अस्पताल में उसका स्मारक बनेगा। इससे नए लड़के प्रेरणा लेंगे और सेना में जाने के लिए मोटिवेट होंगे। 19 जून को अंकुश पंचतत्व में विलीन हो गए। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Ladakh Galwan Valley Martyr Ankush Thakur From Himachal Pradesh Hamirpur Updates; Shaheed Father Speaks To Dainik Bhaskar


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3fPm1Nk

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages