माणा गांव में 5000 साल पुरानी व्यास गुफा, केदारनाथ हादसे के बाद इस साल यहां श्रद्धालुओं की संख्या ना के बराबर, पीढ़ियों से एक परिवार कर रहा है पूजा - news

news

latest english news,breaking news

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Sunday, July 5, 2020

माणा गांव में 5000 साल पुरानी व्यास गुफा, केदारनाथ हादसे के बाद इस साल यहां श्रद्धालुओं की संख्या ना के बराबर, पीढ़ियों से एक परिवार कर रहा है पूजा

आज गुरु पूर्णिमा है। 18 पुराण और महाभारत लिखने वाले वेद व्यास का जन्म इस दिन हुआ था, इसलिए इसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं। उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम से करीब 4 किलोमीटर दूर माणा गांव है। ये भारत का आखिरी गांव है। चीन बार्डर यहां से कुछ किमी दूर ही है।माणा गांव में करीब 5300 साल पुरानी व्यास गुफा है, जहां वेद व्यास रहते थे।

हर साल गुरु पूर्णिमा पर यहां हजारों भक्त पहुंचते हैं, भव्य आयोजन होते हैं, लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से ये पर्व सामान्य तरीके से मनाया जाएगा। व्यास गुफा के पुरोहित पं. हरीश कोठियाल बताते हैं कि 2013 में केदारनाथ हादसे के बाद भी यहां काफी समय तक भक्त नहीं पहुंचे थे। उसके बाद इस साल भी पूरे सीजन लोग नहीं आए।

हमारा परिवार पीढ़ियों से व्यास गुफा में पूजा कर रहा है। कई दशकों में मंदी के ये दो ही साल देखे हैं, जब व्यास गुफा तक लोग नहीं आए हैं। गुफा में आने वाले दान से और माणा गांव में होने वाले धार्मिक आयोजन ही आमदानी के दो जरिए हैं। प्रशासन या सरकार से कोई सहायता नहीं मिलती है।

व्यास गुफा करीब 3200 मीटर (10500 फीट) कीऊंचाई पर है, इसलिए यहां दर्शन के लिए गर्मी के दिनों में (मई-जून)और श्राद्ध पक्ष (अगस्त-सितंबर)में सबसे ज्यादा भक्त पहुंचते हैं। ज्यादातर समय यहां बर्फ जमी होती है। अभी कोरोना की वजह से पूरी गर्मी श्रद्धालु नहीं आए, फिर भी भगवानकी ही कृपा है कि हमें किसी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ा।

परिवार के कई लोग अलग-अलग शहरों में नौकरी कर रहे हैं।चीन की बॉर्डर यहां से ज्यादा दूर नहीं है और अभी चीन भारत के लिए परेशानियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, यहां स्थिति नियंत्रण में ही है।

वेद व्यास की गुफा का इतिहास 5000 साल से ज्यादा पुराना है। इसी स्थान पर वेद व्यास ने महाभारत कही थी और गणेशजी ने लिखी थी।
  • भास्कर नॉलेज

वेदों को 4 भाग में बांटा, 18 पुराणों की रचना की

वेद व्यास को भगवान विष्णु का ही अंश माना गया है। पहले केवल एक वेद था। बाद में इसी गुफा में वेद व्यास ने वेद को चार भागों में विभाजित किया। सभी 18 पुराणों की रचना की। महाभारत की रचना की। नारदजी की प्रेरणा से वेद व्यास ने भागवत गीता की रचना भी यहीं की थी। इसी कारण उन्हें गुरु का पद प्राप्त है और उनके जन्मदिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं।

गुफा के बाहर चट्टानों पर किताबों के पेजों की तरह आकृति दिखाई देती है, जिसे व्यास पोथी कहा जाता है। कलियुग की शुरुआत में व्यास द्वारा लिखे गए भोजपत्र पत्थर के रूप में यहां अवतरित हुए हैं।

5300 साल से भी ज्यादा पुराना है गुफा का इतिहास

स्कंद पुराण में व्यास गुफा के बारे में बताया गया है। गुफा में वेद-व्यास की प्रतिमा है। गुफा के पास ही नर-नारायण पर्वत हैं। इन्हीं पर्वतों के नीचे बद्रीनाथ धाम भी है। ये पूरा क्षेत्र बद्रीकाश्रम कहलाता है। स्कंद पुराण में बताया गया है कि बद्रीकाश्रम की तरह पूज्य और पवित्र स्थान न कभी था और ना ही कभी होगा। महाभारत के समय इसी क्षेत्र में पांडव भी रहे थे। इस क्षेत्र में अलकनंदा और सरस्वती नदी का संगम भी है।

व्यासजी ने ही गांधारी को सौ पुत्र होने का वरदान दिया था।

ऋषि पाराशर और सत्यवती की संतान हैं वेद व्यास

वेद व्यास अष्टचिरंजीवियों में से एक हैं यानी वे हमेशा अमर रहेंगे। इनके पिता ऋषि पाराशर और माता सत्यवती थी। पहले इनका नाम कृष्णद्वैपायन था, क्योंकि वे श्याम वर्ण थे और इनका जन्म एक द्वीप पर हुआ था। बाद में जब इन्होंने वेदों का विभाजन किया, तब इनका नाम वेद व्यास पड़ा।

सत्यवती का विवाह महाराज शांतनु से हुआ था। शांतनु के पुत्र भीष्म थे। भीष्म ने वचन दिया था वे कभी राजा नहीं बनेंगे। सत्यवती के पुत्र विचित्रवीर्य और चित्रांगत की मृत्यु हो गई थी। तब सत्यवती के कहने पर इनकी पत्नियों और एक दासी पर वेद व्यास की कृपा से पांडु, धृतराष्ट्र और विदुर का जन्म हुआ था।

व्यास गुफा के पास भारत की आखिरी चाय की दुकान है। दुकान के संचालक चंद्र सिंह बडवाल ने बताया कि व्यास गुफा आने भक्त और कई बार भारतीय सेना के जवान भी हमारी दुकान चाय पीने आते हैं। ये दुकान करीब 30 साल से चला रहे हैं।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
पं. हरिश कोठियार माणा के गांव के पुरोहित हैं। गांव में होने वाले धार्मिक आयोजन से और गुफा में आने वाले भक्तों की मदद से इनका जीवन यापन होता है।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/31JKoYY

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages